डोनाल्ड ट्रंप को आई अक्ल, समझ गए भारत के बिना नहीं चलेगा काम, जयशंकर ने दी पूरी समझाइश

नई दिल्ली
क्रिटिकल या रेयर अर्थ मिनरल्स एक स्ट्रैटजिक मैटेरियल है. ग्रीन एनर्जी से लेकर इलेक्ट्रिक व्हीकल और फाइटर जेट से लेकर स्मार्टफो तक में इसका उपयोग होता है. इसके बिना इन सभी का उत्पादन संभव नहीं है. पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के जवाब में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर नकेल कस दी थी. बीजिंग के इस कदम से भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक की ऑटो इंडस्ट्री से लेकर अन्य उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ा था. बता दें कि चीन ग्लोबल लेवल पर 90 फीसद से भी ज्यादा क्रिटिकल मिनरल्स का निर्यात करता है. इस सेक्टर में पड़ोसी देश का एकाधिकार है. अब अमेरिका ने चीन के इस वर्चस्व को तोड़ने की दिशा में मजबूत और सार्थक पहल की है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आह्वान पर वॉशिंगटन में 55 देशों के विदेश मंत्री जुटे. रेयल अर्थ मिनरल्स की सप्लाई को बाधाओं से दूर रखने के लिए 50 देशों का ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.
इसमें भारत की भूमिका अहम होने वाली है. भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बैठक में शिरकत की. रेयर अर्थ मिनरल्स पर ग्लोबल पहल भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. भारत में क्रिटिकल मिनरल्स का भंडार है. इस ब्लॉक में शामिल होने से घरेलू स्तर पर रेयर अर्थ मिनरल्स की माइनिंग से लेकर उसकी प्रोसेसिंग तक में टेक्नोलॉजिकल सहयोग मिलेगा. दूसरी तरफ, चीन पर निर्भरता भी कम होगी, जिससे डोमेस्टिक इंडस्ट्री को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा. इससे भविष्य में भारत को रणनीतिक बढ़त भी हासिल होगी. बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में रेयर अर्थ मिनरल्स कॉरिडोर बनाने का उल्लेख किया है.
दरअसल, भारत ने अमेरिका में आयोजित पहले क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल के दौरान नई पहल फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट (FORGE) को समर्थन देने की घोषणा की है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह मंच वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित, विविध और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम कदम है. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर वाशिंगटन पहुंचे हैं, जहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा आयोजित इस मंत्रीस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया. इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. जयशंकर ने इसे परिणाम देने वाला बताया. उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर्स और जिम्मेदार व्यापार जैसी पहलों के जरिए सप्लाई चेन को मजबूत करने पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि FORGE इनिशिएटिव अमेरिका-नेतृत्व वाले मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप की उत्तराधिकारी है और इसका उद्देश्य दुर्लभ खनिजों के प्रोडक्शन और प्रोसेसिंग में विविधता लाना है.
ग्लोबल कॉन्फ्रेंस का क्या है लक्ष्य?
वॉशिंगटन सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति में चीन पर निर्भरता कम करना है. यूरोपीय संघ सहित कई देशों की भागीदारी को वैश्विक आपूर्ति कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. दौरे के दौरान जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से द्विपक्षीय बैठकें भी कीं. इन बैठकों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग और तकनीक जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने क्वाड के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई. जयशंकर ने कहा कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में उपयोगी साबित हुआ है. अमेरिका ने चीन के प्रभुत्व वाले महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) सप्लाई नेटवर्क को चुनौती देने के लिए सहयोगी देशों के साथ एक विशेष व्यापार ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रखा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार 4 फरवरी 2026 को वाशिंगटन में आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठक में इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस सिस्टम समेत अन्य निर्माण के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाना है.
भारत सहित 55 देशों की भागीदारी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि इस बैठक में भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित कुल 55 देशों ने हिस्सा लिया. इन देशों के पास माइनिंग या प्रोसेसिंग (रिफाइनिंग) से जुड़ी क्षमताएं हैं और वे ग्लोबल सप्लाई चेन में विविधता लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. रुबियो ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन कुछ ही देशों में अत्यधिक केंद्रित है और यह स्थिति अब भू-राजनीतिक दबाव का साधन बन चुकी है. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ मिलकर रणनीतिक समाधान अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने मैक्सिको के साथ द्विपक्षीय योजना और यूरोपीय संघ व जापान के साथ त्रिपक्षीय समझौते की घोषणा की, ताकि सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सके. इसके अलावा अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान ने जी-7 और मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप जैसे मंचों पर भी सहयोग बढ़ाने का संकेत दिया.



